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                <title>साहित्य आणि साहित्यिक - Adhunik Kesari</title>
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                <description>साहित्य आणि साहित्यिक RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>रंगपंचमी विशेष कविता ! तुझ्या रंगात भिजावे...</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आधुनिक केसरी </p>
<p>संजय जेवरीकर , पत्रकार</p>
<p>कितीही रंगलो तरी<br />रंगात भिजावे तुझ्या..<br />एकमेकांच्या साक्षीने<br />रंगून जावे तुझ्यात...</p>
<p>रंग प्रेमाचा गुलाबी<br />तुझ्या स्पर्शाने समजला..<br />पांढऱ्या शुभ्र आकाशी<br />जगण्याचा सुर गवसला..</p>
<p>लाल छटा सूर्याची<br />तुझ्या भाळी प्रगटली..<br />हिरव्या गालिच्यावरी<br />काया प्रसन्न दिधली...</p>
<p>रंगात रंगूनी माझा<br />रंग आहे वेगळा..<br />भासे कधी काळा <br />कधी वाटतो पिवळा...</p>
<p>इंद्रधनुच्या साक्षीने<br />रंगाची उधळण केली..<br />चिंब भिजवून तुलाही<br />तू नाही ओली झाली...!</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.adhunikkesari.com/article/13269/mah"><img src="https://www.adhunikkesari.com/media/400/2024-03/img-20240324-wa0254.jpg" alt=""></a><br /><p>आधुनिक केसरी </p>
<p>संजय जेवरीकर , पत्रकार</p>
<p>कितीही रंगलो तरी<br />रंगात भिजावे तुझ्या..<br />एकमेकांच्या साक्षीने<br />रंगून जावे तुझ्यात...</p>
<p>रंग प्रेमाचा गुलाबी<br />तुझ्या स्पर्शाने समजला..<br />पांढऱ्या शुभ्र आकाशी<br />जगण्याचा सुर गवसला..</p>
<p>लाल छटा सूर्याची<br />तुझ्या भाळी प्रगटली..<br />हिरव्या गालिच्यावरी<br />काया प्रसन्न दिधली...</p>
<p>रंगात रंगूनी माझा<br />रंग आहे वेगळा..<br />भासे कधी काळा <br />कधी वाटतो पिवळा...</p>
<p>इंद्रधनुच्या साक्षीने<br />रंगाची उधळण केली..<br />चिंब भिजवून तुलाही<br />तू नाही ओली झाली...!</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>साहित्य आणि साहित्यिक</category>
                                    

                <link>https://www.adhunikkesari.com/article/13269/mah</link>
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                <pubDate>Sun, 24 Mar 2024 09:17:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Aadhunik Kesari]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्रपती संभाजीनगरात रंगणार राज्यस्तरीय काव्य समेंलन </title>
                                    <description><![CDATA[<p>आधुनिक केसरी न्यूज</p>
<p>छत्रपती संभाजीनगर : काळीज माझं साहित्य या  सामाजिक संस्थेमार्फत पहिले भव्य दिव्य मराठी राज्यस्तरीय काव्य संमेलन व पुरस्कार वितरण सोहळा दि.४ जुन २०२३ रोजी छत्रपती संभाजीनगर येथे आयोजित करण्यात आला आहे. </p>
<p>या कार्यक्रमासाठी अध्यक्षस्थानी ज्येष्ठ साहित्यिक प्रा. चंद्रकांत दादा वानखेडे ,प्राध्यापक ज्येष्ठ साहित्यिक, प्रकाशक, संपादक, तसेच उद्घाटक संगिताताई भाऊसाहेब जामगे,ज्येष्ठ साहित्यिका,समाज सेविका,आखिल भारतीय मराठी साहित्य परिषद प्रदेश उपाध्यक्ष असणार आहेत. या काव्य संमेलनासाठी  प्रमुख पाहुणे लताताई पगारे जि.परिषद अध्यक्षा छत्रपती संभाजीनगर,गुलाबराजा फुलमाळी ,गीतकार संपादक साहित्य दर्पण कवि ,गझलकार रज्जाक शेख ,डॉ.सुशिल सातपुते,कवि साहित्यिक प्राध्यापक असणार आहेत.<br />उद्योजक प्रकाश भोसले, छ.संभाजीनगर,ज्येष्ठ साहित्यिक  लक्ष्मण हेंबाडे हे उपस्थित राहणार आहेत.</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.adhunikkesari.com/article/8298/sahitya"><img src="https://www.adhunikkesari.com/media/400/2023-05/6pjntrh8_400x400.jpg" alt=""></a><br /><p>आधुनिक केसरी न्यूज</p>
<p>छत्रपती संभाजीनगर : काळीज माझं साहित्य या  सामाजिक संस्थेमार्फत पहिले भव्य दिव्य मराठी राज्यस्तरीय काव्य संमेलन व पुरस्कार वितरण सोहळा दि.४ जुन २०२३ रोजी छत्रपती संभाजीनगर येथे आयोजित करण्यात आला आहे. </p>
<p>या कार्यक्रमासाठी अध्यक्षस्थानी ज्येष्ठ साहित्यिक प्रा. चंद्रकांत दादा वानखेडे ,प्राध्यापक ज्येष्ठ साहित्यिक, प्रकाशक, संपादक, तसेच उद्घाटक संगिताताई भाऊसाहेब जामगे,ज्येष्ठ साहित्यिका,समाज सेविका,आखिल भारतीय मराठी साहित्य परिषद प्रदेश उपाध्यक्ष असणार आहेत. या काव्य संमेलनासाठी  प्रमुख पाहुणे लताताई पगारे जि.परिषद अध्यक्षा छत्रपती संभाजीनगर,गुलाबराजा फुलमाळी ,गीतकार संपादक साहित्य दर्पण कवि ,गझलकार रज्जाक शेख ,डॉ.सुशिल सातपुते,कवि साहित्यिक प्राध्यापक असणार आहेत.<br />उद्योजक प्रकाश भोसले, छ.संभाजीनगर,ज्येष्ठ साहित्यिक  लक्ष्मण हेंबाडे हे उपस्थित राहणार आहेत. </p>
<p>नवोदित कवि कवयीत्री यांना हक्काचे व्यासपीठ मिळावे यासाठी या काव्य संमेलनाचे आयोजन केले आहे. पुरस्कार समारोह तसेच कवि समेंलन जिजाऊ भवन, बाबा पेट्रोल पंप जवळ ,छत्रपती संभाजीनगर येथे ०४ जुन रोजी सकाळी १० वाजता सुरू होईल.उदघाटन,मान्यवरांचा सन्मान व पुरस्कार वितरण सोहळा ,कवी संमेलन यामध्ये सहभागी  कवींना सन्मानचिन्ह, प्रमाणपत्र, मानाचा फ़ेटा दिला जाईल. या कार्यक्रमाचे  सूत्रसंचालन  रानकवी  जगदीप वनशिव व कवयित्री वैशाली कंकाळ हे करणार आहेत.तरी महाराष्ट्रातील कवि कवयित्रींनी जास्तीत जास्त  सहभाग नोंदवून आपले हक्काच्या व्यासपीठावर  स्थान ग्रहण करावे असे आवाहन संस्थेच्या अध्यक्षा कवयीत्री  सुरेखा बेंद्रे,सरपंच विजय पाटील,अर्चना राहुरकर,डॉ.शुभम बेंद्रे यांनी यांनी केले आहे.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>साहित्य आणि साहित्यिक</category>
                                    

                <link>https://www.adhunikkesari.com/article/8298/sahitya</link>
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                <pubDate>Fri, 19 May 2023 18:21:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Aadhunik Kesari]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व कविता दिवस पर कवि कन्नूलाल विठ्ठोरे जी कि खास रचना </title>
                                    <description><![CDATA[<div>बंजर,स्मशान ,</div>
<div>खून से लथपथ </div>
<div>मानवता की आस </div>
<div>कविता</div>
<div>  </div>
<div>  रुदन,चित्कार</div>
<div>पुकार,गहरे</div>
<div>जख्म का मरहम ।</div>
<div>कविता</div>
<div>  </div>
<div>  निर्दई ,आसुरी</div>
<div>  मानवता के</div>
<div>  अपनत्व की झंकार</div>
<div>कविता</div>
<div>  </div>
<div>  जीवन का संगीत</div>
<div>  संगीतमय जीवन </div>
<div>नौ रसो का परीपाक</div>
<div>  कविता</div>
<div>  </div>
<div>  सफेदपोश कितना भी</div>
<div>  ओढले नकाब</div>
<div>  बेनकाब करती </div>
<div>  रेशा रेशा </div>
<div>कविता</div>
<div>  </div>
<div>डर,आतंक, खोफ</div>
<div>  का कितना भी</div>
<div>  क्यों हो बोलबाला?</div>
<div>अमन,शांति का पैगाम।</div>
<div>कविता</div>
<div>  </div>
<div>किसानों के खून</div>
<div>पसीने का मोल</div>
<div>मजदूर के </div>
<div>मजदूरी का बल,</div>
<div>कविता</div>
<div>  </div>
<div>मां की ममता</div>
<div>  का संस्कार</div>
<div>जवान के</div>
<div>  त्याग की शान।</div>
<div>कविता</div>
<div>  </div>
<div>  अंधकारमय जग मे </div>
<div>संतो के विचारों</div>
<div>  नव प्रकाश </div>
<div>कविता</div>
<div>  </div>
<div>विश्व को एकसूत्र </div>
<div>  ममत्वमई धागा</div>
<div>जीवन का गान,</div>
<div>अमरत्व का दान</div>
<div>कविता</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.adhunikkesari.com/article/7759/mah"><img src="https://www.adhunikkesari.com/media/400/2023-03/inkwell-with-feather-pen.jpg" alt=""></a><br /><div>बंजर,स्मशान ,</div>
<div>खून से लथपथ </div>
<div>मानवता की आस </div>
<div>कविता</div>
<div> </div>
<div> रुदन,चित्कार</div>
<div>पुकार,गहरे</div>
<div>जख्म का मरहम ।</div>
<div>कविता</div>
<div> </div>
<div> निर्दई ,आसुरी</div>
<div> मानवता के</div>
<div> अपनत्व की झंकार</div>
<div>कविता</div>
<div> </div>
<div> जीवन का संगीत</div>
<div> संगीतमय जीवन </div>
<div>नौ रसो का परीपाक</div>
<div> कविता</div>
<div> </div>
<div> सफेदपोश कितना भी</div>
<div> ओढले नकाब</div>
<div> बेनकाब करती </div>
<div> रेशा रेशा </div>
<div>कविता</div>
<div> </div>
<div>डर,आतंक, खोफ</div>
<div> का कितना भी</div>
<div> क्यों हो बोलबाला?</div>
<div>अमन,शांति का पैगाम।</div>
<div>कविता</div>
<div> </div>
<div>किसानों के खून</div>
<div>पसीने का मोल</div>
<div>मजदूर के </div>
<div>मजदूरी का बल,</div>
<div>कविता</div>
<div> </div>
<div>मां की ममता</div>
<div> का संस्कार</div>
<div>जवान के</div>
<div> त्याग की शान।</div>
<div>कविता</div>
<div> </div>
<div> अंधकारमय जग मे </div>
<div>संतो के विचारों</div>
<div> नव प्रकाश </div>
<div>कविता</div>
<div> </div>
<div>विश्व को एकसूत्र </div>
<div> ममत्वमई धागा</div>
<div>जीवन का गान,</div>
<div>अमरत्व का दान</div>
<div>कविता</div>
<div> </div>
<div>देवत्व का स्वत्व,</div>
<div>अंधे की आंख </div>
<div>भूखे की रोटी,</div>
<div>प्यासी का पानी</div>
<div>  कविता</div>
<div> </div>
<div>इतिहास की प्रेरणा </div>
<div>ईश्वर की आराधना </div>
<div>जीवन की साधना</div>
<div> प्रेम की पवित्रता </div>
<div> कविता</div>
<div> </div>
<div>धर्म का मर्म,</div>
<div>सेवा का मोल, </div>
<div>चरित्र का निर्माण </div>
<div>कविता..</div>
<div> </div>
<div>क्रांतिकारियों का सम्मान</div>
<div>महापुरुषों का मान</div>
<div>विश्व मानवता का गान</div>
<div>जीवन का वरदान..</div>
<div> कविता</div>
<div> </div>
<div>विश्व कविता दिवस की आप सभी शब्दों के साधक कवियों को हार्दिक हार्दिक शुभकामनाएं...</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>साहित्य आणि साहित्यिक</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Mar 2023 19:00:07 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मराठी ही ज्ञानभाषा करण्यासाठी शासन वचनबद्ध : देवेंद्र फडणवीस</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p>आधुनिक केसरी न्यूज </p>
<p>प्रमोद पाणबुडे</p>
<p>वर्धा : कोणत्याही भाषेचे संगोपन होण्यासाठी तिचा वापर ज्ञानार्जनासाठी होणे आवश्यक आहे. तंत्रज्ञान, विज्ञान आणि ज्ञानावर आधारीत सर्व क्षेत्रामध्ये मराठी भाषेचा वापर करण्यासाठी, मराठी ही ज्ञानभाषा करण्यासाठी शासन वचनबद्ध असल्याची ग्वाही उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी आज येथे दिली. विदर्भ साहित्य संघाला शताब्दी वर्ष पूर्ण होत असल्याच्या निमित्ताने त्यांनी यावेळी दहा कोटी रुपयांच्या निधीची घोषणाही केली.<br />मराठी सारस्वतांच्या उपस्थितीत वर्धा येथे ९६ वे अखिल भारतीय मराठी साहित्य संमेलनाचा आज समारोप होत आहे. समारोपीय दिवसाच्या शुभारंभ सत्रात आपल्या शुभेच्छा संदेशांमध्ये त्यांनी मराठी भाषेला ज्ञानभाषा करण्याच्या पुनरुच्चार केला. गेल्या काही वर्षामध्ये भाषा संवर्धनात आलेला ऱ्हास भरून निघेल. आता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p> </p>
<p>आधुनिक केसरी न्यूज </p>
<p>प्रमोद पाणबुडे</p>
<p>वर्धा : कोणत्याही भाषेचे संगोपन होण्यासाठी तिचा वापर ज्ञानार्जनासाठी होणे आवश्यक आहे. तंत्रज्ञान, विज्ञान आणि ज्ञानावर आधारीत सर्व क्षेत्रामध्ये मराठी भाषेचा वापर करण्यासाठी, मराठी ही ज्ञानभाषा करण्यासाठी शासन वचनबद्ध असल्याची ग्वाही उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी आज येथे दिली. विदर्भ साहित्य संघाला शताब्दी वर्ष पूर्ण होत असल्याच्या निमित्ताने त्यांनी यावेळी दहा कोटी रुपयांच्या निधीची घोषणाही केली.<br />मराठी सारस्वतांच्या उपस्थितीत वर्धा येथे ९६ वे अखिल भारतीय मराठी साहित्य संमेलनाचा आज समारोप होत आहे. समारोपीय दिवसाच्या शुभारंभ सत्रात आपल्या शुभेच्छा संदेशांमध्ये त्यांनी मराठी भाषेला ज्ञानभाषा करण्याच्या पुनरुच्चार केला. गेल्या काही वर्षामध्ये भाषा संवर्धनात आलेला ऱ्हास भरून निघेल. आता केंद्र शासनाने नवीन शिक्षण निती तयार केली असून इंग्रजीऐवजी आता मराठी भाषेत सर्व ज्ञान आधारित अभ्यासक्रम तयार केले जातील. मराठी आता व्यवहारातील ज्ञानभाषा होईल, असे त्यांनी स्पष्ट केले. यावेळी मेघे इन्स्टिट्यूटमध्ये मराठी भाषेत वैद्यकीय शिक्षणाचा अभ्यासक्रम सुरू करण्याबाबतच्या कार्यक्रमात सहभागी झाल्याचे त्यांनी सांगितले.<br />यावेळी व्यासपीठावर केंद्र शासनाच्या भारतीय संस्कृती संशोधन परिषदेचे अध्यक्ष डॉ.विनय सहस्त्रबुद्धे, अखिल भारतीय मराठी साहित्य महामंडळाच्या अध्यक्षा उषा तांबे, विदर्भ साहित्य संघाचे अध्यक्ष प्रदीप दाते, महामंडळाचे कार्यवाह उज्वला मेहेंदळे, खा.रामदास तडस, खा.अनिल बोंडे, आ.समीर मेघे, आ.समीर कुणावार, आ. डॉ.पंकज भोयर, जिल्हाधिकारी राहुल कर्डिले, सागर मेघे व साहित्य क्षेत्रातील मान्यवर उपस्थित होते.<br />विदर्भ साहित्य संघाच्या शताब्दी वर्षानिमित्त, स्वातंत्र्याच्या अमृत महोत्सवी वर्षात महात्मा गांधी, विनोबा भावे यांच्या कर्मभूमीत होत असलेल्या आयोजनाचा विशेष आनंद असल्याचे त्यांनी सांगितले. ते म्हणाले, स्वातंत्र्याचा लढा असो, भूदान चळवळ असो, शेवटच्या माणसाला न्याय देण्याचे काम या भूमीतूनच झाले आहे. संपूर्ण स्वराज्याची मागणी येथे झाली होती. रामराज्य, सुराज्याच्या शाश्वत विचारांचा संदेश याच भूमीतून दिला गेला. त्यामुळे साहित्य संमेलन येथे होणे अतिशय औचित्यपूर्ण आहे. थोडक्यात स्वातंत्र्याची 'ब्ल्यू प्रिंट' तयार करणारी ही भूमी आहे. <br />साहित्याच्या व्यासपीठावर राजकीय नेतृत्वाचे काय काम? हा प्रश्न नियमित विचारला जातो. मात्र साहित्य निर्मितीत राजकीय व्यक्तिमत्व किती महत्त्वपूर्ण ठरतात, याचे खुमासदार वर्णन त्यांनी यावेळी केले.<br />वर्धा साहित्य संमेलनात प्रत्येक मंच वैदर्भीय साहित्यिकांना समर्पित आहे. याची नोंद उपमुख्यमंत्र्यांनी आपल्या भाषणात घेतली. प्राचार्य राम शेवाळकर यांच्या नावाने मुख्य व्यासपीठ आहे. ते म्हणाले प्रा. राम शेवाळकर यांचे व्याख्यान ऐकणे, ही ज्ञानवर्धक बाब होती. न्यायमूर्ती चंद्रशेखर धर्माधिकारी, महेश एलकुंचवार, आशाताई बगे, आशाताई सावदेकर यांच्यासारख्या साहित्यिकांनी विचाराची प्रेरणा दिली आहे. कवीवर्य सुरेश भट यांनी मराठीला गझल देऊन भाषेला उंचीवर पोहचवले, कविवर्य ग्रेस यांनी तर तरुणाईला वेड लावले होते. त्यामुळे विदर्भाच्या भूमीत साहित्य संमेलनाचे आयोजन आनंददायी असल्याचे त्यांनी सांगितले.<br />साहित्य संमेलनासोबतच नव माध्यमांची मुबलक उपलब्धता अभिव्यक्तीचे नवे दालन म्हणून पुढे येत आहे. मात्र नवमाध्यमांमुळे नव साहित्यिक वेगळी अभिव्यक्ती प्रदर्शित करीत असले तरी मात्र उंची आणि खोलीचे साहित्य पुस्तकातून अभिव्यक्त होते. त्यामुळे आजही पुस्तकांचे संदर्भ महत्त्वपूर्ण ठरत असल्याचे त्यांनी सांगितले. <br />महात्मा गांधी यांनी आपल्या लेखनातून लेखक, साहित्यिक, यांनी दिलेल्या संदेशाचा दाखला दिला. ते म्हणाले, गांधींजी म्हणत... "शब्द हे सामर्थ्य देतात. तसेच ते संयमही सांगतात. आपला अहंकार कठोर शब्द वापरावे सांगत असेल तरी अंतःकरणाने परवानगी देऊ नये. भावना उद्दीपित करणाऱ्या शब्दांचा वापर होऊ नये"    . साहित्य कसे जन्माला येते याबाबत गांधीजींनी विचार मांडले आहेत. त्यानुसार मुल्यातून विचार.. विचारातून शब्द .. शब्दातून कृती ..आणि कृतीतून व्यक्तिमत्त्वाची अभिव्यक्ती घडत असते...आणि त्यातून पुन्हा नवीन मूल्ये  जन्माला येतात. ती मूल्ये आपले प्राक्तन लिहीत असता. स्थित्यंतरातून नवीन मूल्य जन्माला येतात. मात्र काही शाश्वत मूल्ये चिरंतन महत्वाची असतात. ती कायम जपली पाहिजेत. <br />त्यांनी या व्यासपीठावर मराठीमध्ये होणाऱ्या विविध साहित्य संमेलनांचा गौरव केला. मराठी भाषेत सर्वाधिक संमेलने होतात. ही परंपरा वैशिष्ट्यपूर्ण आहे. ही सर्व संमेलने साहित्य आणि आपल्या अभिव्यक्तीला समृद्ध करत असतात. त्यामुळे संमेलनाची परंपरा मोलाची आहे. विदर्भ साहित्य संघ आणि मराठी साहित्य महामंडळ या संस्थांचे साहित्य आणि मराठी संवर्धनात अभिमानास्पद कार्य करीत असल्याचे त्यांनी सांगितले. विदर्भ साहित्य संघाच्या वाटचालीबद्दल त्यांनी यावेळी विचार व्यक्त करताना अतिशय संघर्षमय स्थितीतून विदर्भ साहित्य संघाने आतापर्यंत वाटचाल केली असून 100 वर्षातील वाटचालीची विशेष नोंद घेतली असल्याचे सांगितले. शताब्दी वर्षानिमित्त विदर्भ साहित्य संघाला दहा कोटींचा निधी राज्य शासनातर्फे देणगी म्हणून देण्यात येईल, अशी घोषणा त्यांनी यावेळी केली.<br />वर्धा येथील साहित्य संमेलन हे उणीवांवर बोट ठेवण्यापेक्षा जाणिवा समृद्ध करण्यात यशस्वी होईल. आपल्या सर्व अभिव्यक्तींना या ठिकाणी स्थान मिळेल, सर्व प्रकारच्या अभिव्यक्तीला स्थान देऊनही ते समृद्ध होईल, अशा शुभेच्छाही त्यांनी शेवटी दिल्या.<br />सुरुवातीस संमेलनाचे कार्याध्यक्ष प्रा.प्रदिप दाते यांनी प्रास्ताविक केले. संमेलन गिताचे सादरीकरण देखील झाले. यावेळी उपमुख्यमंत्री व मान्यवरांच्या हस्ते संमेलनानिमित्त तयार करण्यात आलेल्या 'वरदा' या स्मरणिकेचे प्रकाशन करण्यात आले.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>साहित्य आणि साहित्यिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Feb 2023 16:30:39 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Aadhunik Kesari]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Video : विद्रोही साहित्य संमेलनात 50 खोके एकदम ओके म्हणत शिरले कार्यकर्ते</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p></p>
<p>  </p>
<p>आधुनिक केसरी न्यूज </p>
<p>अँकर - वर्ध्याच्या सर्कस मैदानावर सुरू असलेले विद्रोही मराठी साहित्य संमेलनात अभिनेत्री रसिका आगाशे यांचे भाषण सुरु असताना काही कार्यकर्त्यांनी गळ्यात खोके घालून सभा मंडपात प्रवेश केला. सभामंडपात प्रवेश केल्यावर व्यासपीठाजवळ आल्यावर तेथे सर्वच चकित झाले. व्यसपीठाजवळ येऊन 50 खोके  एकदम ओके अशा घोषणा देऊन कार्यकर्त्यांनी लक्ष वेधले आहे. काही काँग्रेस तर काही आंबेडकरवादी कार्यकर्त्यांचा यात समावेश होता. </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p> </p>
<p><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/eAKzL4AMs7E" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></p>
<p> </p>
<p><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/cBIHlTSA0W0" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe>आधुनिक केसरी न्यूज </p>
<p>अँकर - वर्ध्याच्या सर्कस मैदानावर सुरू असलेले विद्रोही मराठी साहित्य संमेलनात अभिनेत्री रसिका आगाशे यांचे भाषण सुरु असताना काही कार्यकर्त्यांनी गळ्यात खोके घालून सभा मंडपात प्रवेश केला. सभामंडपात प्रवेश केल्यावर व्यासपीठाजवळ आल्यावर तेथे सर्वच चकित झाले. व्यसपीठाजवळ येऊन 50 खोके  एकदम ओके अशा घोषणा देऊन कार्यकर्त्यांनी लक्ष वेधले आहे. काही काँग्रेस तर काही आंबेडकरवादी कार्यकर्त्यांचा यात समावेश होता. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>साहित्य आणि साहित्यिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Feb 2023 17:18:59 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Aadhunik Kesari]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तळमळीतूनच साहित्य व राजकीय नेतृत्वाची निर्मिती : मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे                   </title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p>  </p>
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<p></p>
<p>आधुनिक केसरी न्यूज </p>
<p>प्रमोद पाणबुडे</p>
<p>वर्धा : जगण्याचे बळ देणारे साहित्यिक हे मुळात सामाजिक नेते असतात.जगण्याच्या तळमळीतून साहित्य आणि राजकीय नेतृत्व निर्माण होते. समाजाला दिशा देणाऱ्या या दोन्हींचे उगमस्थान साहित्यच आहे. त्यामुळे साहित्य क्षेत्रातील दिग्गजांच्या मार्गदर्शनाचा व सूचनांचा राज्यशासन कायम आदर करीत आल्याचे प्रतिपादन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यांनी आज ९६व्या अखिल भारतीय मराठी साहित्य संमेलनाच्या उद्घाटन प्रसंगी व्यक्त केले. <br />विदर्भ साहित्य संघाच्या शताब्दी वर्षानिमित्त येथील आचार्य विनोबा भावे सभामंडपात प्राचार्य राम शेवाळकर व्यासपीठावर आयोजित या संमेलनाचे  उद्घाटन मुख्यमंत्री श्री.शिंदे यांच्याहस्ते झाले, यावेळी ते बोलत होते. संमेलनाध्यक्ष न्या.नरेंद्र चपळगावकर, शालेय शिक्षण तथा मराठी भाषा मंत्री दीपक केसरकर,  पूर्वाध्यक्ष भारत सासणे, स्वागताध्यक्ष</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.adhunikkesari.com/article/7454/mah"><img src="https://www.adhunikkesari.com/media/400/2023-02/img-20230203-wa0334.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/G9vSsHM_tZA" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></p>
<p>आधुनिक केसरी न्यूज </p>
<p>प्रमोद पाणबुडे</p>
<p>वर्धा : जगण्याचे बळ देणारे साहित्यिक हे मुळात सामाजिक नेते असतात.जगण्याच्या तळमळीतून साहित्य आणि राजकीय नेतृत्व निर्माण होते. समाजाला दिशा देणाऱ्या या दोन्हींचे उगमस्थान साहित्यच आहे. त्यामुळे साहित्य क्षेत्रातील दिग्गजांच्या मार्गदर्शनाचा व सूचनांचा राज्यशासन कायम आदर करीत आल्याचे प्रतिपादन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यांनी आज ९६व्या अखिल भारतीय मराठी साहित्य संमेलनाच्या उद्घाटन प्रसंगी व्यक्त केले. <br />विदर्भ साहित्य संघाच्या शताब्दी वर्षानिमित्त येथील आचार्य विनोबा भावे सभामंडपात प्राचार्य राम शेवाळकर व्यासपीठावर आयोजित या संमेलनाचे  उद्घाटन मुख्यमंत्री श्री.शिंदे यांच्याहस्ते झाले, यावेळी ते बोलत होते. संमेलनाध्यक्ष न्या.नरेंद्र चपळगावकर, शालेय शिक्षण तथा मराठी भाषा मंत्री दीपक केसरकर,  पूर्वाध्यक्ष भारत सासणे, स्वागताध्यक्ष माजी खासदार दत्ता मेघे, साहित्य अकादमीचे माजी अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. विश्वनाथप्रसाद तिवारी, प्रसिद्ध हिंदी कवी डॉ. कुमार विश्वास आणि डॉ. डी. वाय. पाटील अभिमत विद्यापीठाचे कुलपती डॉ. पी. डी. पाटील, विदर्भ साहित्य संघाचे अध्यक्ष तथा आयोजन समितीचे कार्याध्यक्ष प्रदीप दाते आदि उपस्थित होते.<br />मुख्यमंत्री श्री.शिंदे म्हणाले, वर्धा ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी आणि विनोबा भावे यांच्या वास्तव्याने पावन झालेली भूमी आहे. हे दोन्ही महान नेते एक उत्तम लेखक होते. या प्रभावळीत लोकमान्य टिळक, महात्मा जोतिबा फुले, डॉ बाबासाहेब आंबेडकर,स्वातंत्र्यवीर सावरकर, अटलबिहारी वाजपेयी, यशवंतराव चव्हाण, प्रबोधनकार ठाकरे, बाळासाहेब ठाकरे आदी राजकीय नेते हे उत्तम लेखक होते. लोकसेवेचे व्रत घेवून या सर्व नेत्यांनी साहित्यातूनच आपल्या सामाजिक व राजकीय कार्याची मोट बांधल्याचे मुख्यमंत्री  श्री . शिंदे म्हणाले. राजकीय नेतृत्वाचे उगमस्थान साहित्य असल्याचे यातून अधोरेखित होते, त्यामुळे लोकसेवेच्या व्रताला बळ देण्यासाठी साहित्यिकांकडून राज्यकर्त्यांना मार्गदर्शन व्हावे, अशा भावना त्यांनी व्यक्त केल्या.</p>
<p>-  मराठी साहित्य संमेलन हे सुदृढ सांस्कृतिक लोकशाहीचे विशाल रूप</p>
<p>मराठी भाषा ही चमत्कार घडविणारी आहे. संत साहित्य आणि साहित्याच्या विविध प्रवाहांनी या भाषेला समृद्ध केले आहे. अखिल भारतीय मराठी साहित्य संमेलनाच्या माध्यमातून मराठी भाषेचा उत्सव साजरा होतो. हे संमेलन म्हणजे सुदृढ सांस्कृतिक लोकशाहीचे विशाल रूप असल्याचे गौरवोद्गारही श्री शिंदे यांनी काढले.मराठी भाषा संमेलनाची शतकाकडे होत असलेली वाटचाल ही गौरवाची बाब आहे. लक्षावधी सारस्वत या संमेलनासाठी महाराष्ट्र व देशातून दरवर्षी एकत्र येतात ही ओढ अद्भूत आहे. राज्याच्या ग्रामीण भागातून उत्तम लेखक व सकस साहित्य निर्माण होत असल्याबाबत त्यांनी समाधान व्यक्त केले. शासकीय पातळीहूनही मराठी बोलीभाषेच्या संवर्धनासाठी कार्य करण्यात येत असल्याचे सांगत मराठी साहित्याच्या समृद्धीसाठी राज्यशासन सदैव पुढाकार घेईल, असा विश्वासही त्यांनी व्यक्त केला. मराठी भाषेची सेवा करणाऱ्या महाराष्ट्राबाहेरील संस्थांना संमेलनासाठी तसेच वारकरी संमेलनासाठी राज्य शासनाने प्रत्येकी २५ लाख रुपयांचा निधी उपलब्ध करून दिल्याचेही त्यांनी सांगितले.<br />मुख्यमंत्र्यांनी यावेळी नागरी जीवनाबरोबरच ग्रामीण भागातील बदलांची साहित्यिकांनी नोंद घेण्याचे आवाहन करतांना समृद्धी महामार्गाचा उल्लेख केला. या महामार्गासारख्या महत्वाकांक्षी प्रकल्पामुळे ग्रामीण व नागरी जीवनावर झालेल्या सकारात्मक बदलांचे प्रतिबिंब साहित्यात उमटावे,देश-विदेशातील विकासात्मक व प्रेरणादायी साहित्य मराठी भाषेत अनुवादित व्हावे,  शासन यासाठी सर्वतोपरी मदत करण्यास तत्पर असल्याचे त्यांनी  सांगितले.<br />      - संमेलनाध्यक्षांना राज्य अतिथीचा दर्जा</p>
<p>अखिल भारतीय मराठी साहित्य संमेलनाच्या अध्यक्षांना राज्य अतिथींचा (स्टेट गेस्ट) दर्जा देण्यात येत असल्याची  घोषणा  मुख्यमंत्री  श्री. शिंदे यांनी केली. मराठी साहित्य मंडळाने राज्य शासनाकडे या संदर्भात मागणी केली होती, ती मागणी मान्य करण्यात आल्याचे त्यांनी सांगितले.</p>
<p>- वर्ध्यातील ‘लाईट, साऊंड ॲन्ड लेझर शो’ ची मागणी मान्य</p>
<p>वर्धा येथील साहित्य संमेलनात शहराच्या स्वातंत्र्य चळवळीतील सहभागाला मुख्यमंत्र्यांनी  अधोरेखित केले. आमदार डॉ. पंकज भोयर यांनी  सेवाग्राम मार्गावरील चरखा भवन येथे महात्मा गांधी  आणि विनोबा भावे यांच्या मोठ्या प्रतिमा लावलेल्या ठिकाणी ‘लाईट, साऊंड अँड लेझर शो’ राज्य शासना मार्फत सुरु करण्यात यावा, अशी मागणी केली होती. मुख्यमंत्र्यांनी आपल्या भाषणात वर्ध्याच्या वैभवात भर घालण्यासाठी सौदर्यीकरणाची ही मागणी मान्य करण्यात येत असल्याचे जाहीर केले.<br />मराठी भाषा मंत्री,दीपक केसरकर यांनीही यावेळी संबोधित केले. ते म्हणाले,साहित्यिक हे समाजाची ज्योत आहे, ही ज्योत तेवत ठेवण्यासाठी राज्य शासन सदैव पाठिशी आहे. मराठी साहित्याच्या विकासासाठी राज्य शासनाची प्रतिबद्धता असल्याचे सांगत त्यांनी साहित्य क्षेत्रात राज्य शासन हस्तक्षेप करणार नाही. सातारा जिल्ह्यातील वाई येथे मराठी विश्वकोष भवन आणि मुंबईत मराठी भाषा भवन बांधण्यात येत आहे. अखिल भारतीय मराठी साहित्य संमेलनासाठी देण्यात येणारे अनुदान ५० लाखाहून वाढवून २ कोटी करण्यात आले. तसेच, विश्व साहित्य संमेलनाच्या आयोजनासाठीचे अनुदान १० कोटींहून वाढवून १५ कोटी केल्याचेही त्यांनी सांगितले .  <br />यावेळी दत्ता मेघे, पद्मश्री डॉ. विश्वनाथप्रसाद  तिवारी,डॉ. कुमार विश्वास,न्या.नरेंद्र चपळगावकर, भारत सासणे, प्रदीप दाते आदिंची समयोचित भाषणे झाली. मुख्यमंत्र्यांच्याहस्ते संमेलनाध्यक्ष न्या.नरेंद्र चपळगावकर आणि पूर्वाध्यक्ष भारत सासणे यांचा सत्कार करण्यात आला. विदर्भ साहित्य संघाच्या शताब्दी वर्षाच्या निमिताने प्रकाशित करण्यात आलेल्या  ‘दौत लेखनी’ या गौरव ग्रंथाचे प्रकाशनही मुख्यमंत्र्याच्या हस्ते झाले. यावेळी आयोजन समितीच्यावतीने तयार करण्यात आलेल्या वर्धा गौरव गित, कविवर्य सुरेश भट यांच्या ‘लाभले आम्हास भाग्य…’ हे मराठी अभिमान गित आणि संमेलन गिताचे सादरीकरण झाले. कार्यक्रमाचे सूत्रसंचालन रेणुका देशकर यांनी तर आभार प्रदर्शन अखिल भारतीय मराठी साहित्य मंडळाच्या कार्यवाह डॉ. उज्ज्वला मेहंदळे यांनी केले.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>साहित्य आणि साहित्यिक</category>
                                    

                <link>https://www.adhunikkesari.com/article/7454/mah</link>
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                <pubDate>Fri, 03 Feb 2023 18:25:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Aadhunik Kesari]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Video : ग्रंथदिंडीने दुमदुमली महात्मा गांधी साहित्य नगरी !</title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p>  </p>
<p>आधुनिक केसरी न्यूज </p>
<p>वर्धा  : 96 व्या अखिल भारतीय मराठी साहित्य संमेलनाची आज ग्रंथादिंडीने सुरवात करण्यात आली.सकाळी वर्धेच्या महात्मा गांधी पुतळ्यापासून या ग्रंथादिंडीला सुरवात झाली.ग्रंथदिंडीने  महात्मा गांधी साहित्य नगरी दुमदुमली.  लेझीम पताका, झाकी, अनेक दृश्य येथे पाहायला मिळाले, 10 शाळांचे विद्यार्थी यात सामील झाले.शहरातील.विविध मार्गे दिंडी संमेलन स्थळी पोहचली.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.adhunikkesari.com/article/7453/mah"><img src="https://www.adhunikkesari.com/media/400/2023-02/screenshot_20230203-144013_whatsapp.jpg" alt=""></a><br /><p><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/3bldLml6alA" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></p>
<p> </p>
<p>आधुनिक केसरी न्यूज </p>
<p>वर्धा  : 96 व्या अखिल भारतीय मराठी साहित्य संमेलनाची आज ग्रंथादिंडीने सुरवात करण्यात आली.सकाळी वर्धेच्या महात्मा गांधी पुतळ्यापासून या ग्रंथादिंडीला सुरवात झाली.ग्रंथदिंडीने  महात्मा गांधी साहित्य नगरी दुमदुमली.  लेझीम पताका, झाकी, अनेक दृश्य येथे पाहायला मिळाले, 10 शाळांचे विद्यार्थी यात सामील झाले.शहरातील.विविध मार्गे दिंडी संमेलन स्थळी पोहचली.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>साहित्य आणि साहित्यिक</category>
                                    

                <link>https://www.adhunikkesari.com/article/7453/mah</link>
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                <pubDate>Fri, 03 Feb 2023 14:41:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Aadhunik Kesari]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्पेशल : मी नसतांना______!</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p>आधुनिक केसरी </p>
<p>सागरकुमार झनके,<br />मो.9822575244</p>
<p>भाऊ बहिन आणि वडीलांच्या सावलीला पारखी झालेली...पोरके पणाची सल कुठतली काळजात रूतलेली...आईच्या आधाराने मोठी झालेली तीची लेक...माय अन् लेकीची होत असलेली आगतीकता...आईचा आपल्या काळजाच्या तुकड्यासाठी होत असलेला आक्रोश... माझ्या पाठीमाग माझ्या लेकराच काय होईल या विवंचणेत अडकलेलं तीचं मन...माय लेकीच्या जीवणावर रेखाटलेली ही कविता थेट काळजाचा ठाव घेते....</p>
<p><br />आई बापाची लाडाची<br />तू जाशिल सासरी ग,<br />तुझी आठवण बाई मला<br />हर घडीला येईल ग...|| १ ||</p>
<p>माय बापाची तू चीमणी <br />आज उडून तू गेली,<br />तुझ्यासाठीच ग पोरी<br />सारी जींदगी ही गेली...|| २ ||</p>
<p>शिलवंतांची तू लेक<br />आहे एकोणती एक,<br />चारित्र्यान ग तू नेक<br />बुद्ध भिमाची तू</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.adhunikkesari.com/article/6368/mah"><img src="https://www.adhunikkesari.com/media/400/2022-10/img-20190504-5ccd8292dc5c3.png" alt=""></a><br /><p> </p>
<p>आधुनिक केसरी </p>
<p>सागरकुमार झनके,<br />मो.9822575244</p>
<p>भाऊ बहिन आणि वडीलांच्या सावलीला पारखी झालेली...पोरके पणाची सल कुठतली काळजात रूतलेली...आईच्या आधाराने मोठी झालेली तीची लेक...माय अन् लेकीची होत असलेली आगतीकता...आईचा आपल्या काळजाच्या तुकड्यासाठी होत असलेला आक्रोश... माझ्या पाठीमाग माझ्या लेकराच काय होईल या विवंचणेत अडकलेलं तीचं मन...माय लेकीच्या जीवणावर रेखाटलेली ही कविता थेट काळजाचा ठाव घेते....</p>
<p><br />आई बापाची लाडाची<br />तू जाशिल सासरी ग,<br />तुझी आठवण बाई मला<br />हर घडीला येईल ग...|| १ ||</p>
<p>माय बापाची तू चीमणी <br />आज उडून तू गेली,<br />तुझ्यासाठीच ग पोरी<br />सारी जींदगी ही गेली...|| २ ||</p>
<p>शिलवंतांची तू लेक<br />आहे एकोणती एक,<br />चारित्र्यान ग तू नेक<br />बुद्ध भिमाची तू लेक....|| ३ ||</p>
<p>लहानाचे मोठे करून<br />सांभाळीले ग मी तूला,<br />तुझ्याविना ग जीवण हे<br />सुने-सूने वाटे मला...|| 4 ||</p>
<p>तुझ्या सुखासाठी मी ग <br />कष्ट सोसले अपार,<br />अंगावरी मी सोसली<br />भर उन्हाची दूपार...|| ५ ||</p>
<p>या स्वार्थी दुनियेत<br />कोणी नाही ग कोणाचे,<br />दिल्या घेतल्याचे सारे<br />मतलबी या मणाचे...|| ६ ||</p>
<p>कोण विचारिल तुला<br />मी दूरदेशी जाता,<br />नको विश्वास तू ठेवू<br />गणगोतावरी आता...|| ७ |</p>
<p>तुझ्या जीवाची ग पोरी<br />काळजी वाटे मला,<br />मी सोडून गेल्यावरी<br />कोण पाहिल ग तूला...|| ८ ||</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>साहित्य आणि साहित्यिक</category>
                                    

                <link>https://www.adhunikkesari.com/article/6368/mah</link>
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                <pubDate>Sun, 02 Oct 2022 15:19:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Aadhunik Kesari]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रविवार विशेष : म्हसन्टीतली दारू_______</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p>आधुनिक केसरी</p>
<p>सागरकुमार झनके,<br />मो.9822575244</p>
<p><br />आमचं गाव भाऊ<br />लय चागल़ होतं...<br />गावामंदी दारुच<br />अजीबात नाव न्होतं...</p>
<p>आता मात्र गावाची<br />कमालच झाली...<br />दारू माऊली आमच्या<br />शेजारीच आली...</p>
<p>शेजारीच गावाच्या<br />दुकान दारूचं थाटलं...<br />गावातल्या लोकायले ते<br />उलसक नाही पटलं...</p>
<p>ज्याले त्याले वाटे<br />हे असं कसं झालं..<br />अन् दारूचं दुकान<br />आपल्या शेजारी आलं...</p>
<p>असा आमच्या गावाचा<br />विकास होवून रायला...<br />असा विकास गावानं<br />भाऊ कधीच नाही पायला...</p>
<p>दारूच दुकान आमच्या<br />स्मशानात थाटलं...<br />खरं सांगतो भाऊ हे<br />कोणालेच नाही पटलं...</p>
<p>मले वाटे गावमंदी<br />वाचणालय खोलतीन...<br />लहान मोठे जवान पोरं<br />मग पुस्तकासंग बोलतीन...</p>
<p>पुस्तक रायले दूरच<br />आता दारू बोलून रायली...<br />अशी दारू सागा भाऊ <br />कधी कोन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.adhunikkesari.com/article/6366/mah"><img src="https://www.adhunikkesari.com/media/400/2022-10/img-20221002-wa0059.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p>आधुनिक केसरी</p>
<p>सागरकुमार झनके,<br />मो.9822575244</p>
<p><br />आमचं गाव भाऊ<br />लय चागल़ होतं...<br />गावामंदी दारुच<br />अजीबात नाव न्होतं...</p>
<p>आता मात्र गावाची<br />कमालच झाली...<br />दारू माऊली आमच्या<br />शेजारीच आली...</p>
<p>शेजारीच गावाच्या<br />दुकान दारूचं थाटलं...<br />गावातल्या लोकायले ते<br />उलसक नाही पटलं...</p>
<p>ज्याले त्याले वाटे<br />हे असं कसं झालं..<br />अन् दारूचं दुकान<br />आपल्या शेजारी आलं...</p>
<p>असा आमच्या गावाचा<br />विकास होवून रायला...<br />असा विकास गावानं<br />भाऊ कधीच नाही पायला...</p>
<p>दारूच दुकान आमच्या<br />स्मशानात थाटलं...<br />खरं सांगतो भाऊ हे<br />कोणालेच नाही पटलं...</p>
<p>मले वाटे गावमंदी<br />वाचणालय खोलतीन...<br />लहान मोठे जवान पोरं<br />मग पुस्तकासंग बोलतीन...</p>
<p>पुस्तक रायले दूरच<br />आता दारू बोलून रायली...<br />अशी दारू सागा भाऊ <br />कधी कोन पायली...</p>
<p>आता जो तो प्यायले<br />भाऊ म्हसन्टीत जाते...<br />टाईट होऊन तीकडून<br />डूलत डालत येते...</p>
<p>म्हसन्टीतल्या दारूचा<br />लयच आला पूर...<br />एक दिवस तीलेत<br />जा लागीनच दूर...</p>
<p>सपनातही नाही वाटलं मले<br />अस काही होईन...<br />म्हसन्टीतल्या दारूवर<br />मी अशी कविता लिहिन...</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>साहित्य आणि साहित्यिक</category>
                                    

                <link>https://www.adhunikkesari.com/article/6366/mah</link>
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                <pubDate>Sun, 02 Oct 2022 08:38:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Aadhunik Kesari]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Video : कल्लोळातही सहीसलामत राहण्यासाठी माध्यम साक्षरता, तारतम्य गरजेचे : अतुल पेठे </title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p>आधुनिक केसरी न्यूज </p>
<p>पुणे : "माध्यमे ही जशी जागृतीची साधने आहेत, तशी ती भीतीची दुकानेही आहेत. माध्यमांमधील हा कल्लोळ पूर्वीपासून आहे. त्यामुळे माध्यमांना दोष देण्याऐवजी त्यातले चांगले-वाईट समजून घ्यायला हवे. त्यासाठी तारतम्य बाळगत, मधली ओळ वाचत आपण माध्यम साक्षर व्हायला हवे," असे प्रतिपादन ज्येष्ठ नाट्य-दिग्दर्शक अतुल पेठे यांनी केले.</p>
<p>मनोविकास प्रकाशनातर्फे नीलांबरी जोशी लिखित 'माध्यम कल्लोळ' ग्रंथाचे प्रकाशन व मुक्त संवादात अतुल पेठे बोलत होते. टिळक रस्त्यावरील मराठा चेंबर ऑफ कॉमर्सच्या पदमजी सभागृहात झालेल्या कार्यक्रमावेळी अभिनेते गिरीश कुलकर्णी, माध्यम अभ्यासक समीरण वाळवेकर, ज्येष्ठ पत्रकार रवि आमले, मनोविकास प्रकाशनाचे अरविंद पाटकर आदी उपस्थित होते.</p>
<p>अतुल पेठे म्हणाले, "बाह्यजगात आपल्याला उत्पादन आणि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.adhunikkesari.com/article/6281/mah"><img src="https://www.adhunikkesari.com/media/400/2022-09/screenshot_20220925-173723_whatsappbusiness.jpg" alt=""></a><br /><p><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/9y0XU3GF3lA" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/CnVlKEFqt7w" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></p>
<p>आधुनिक केसरी न्यूज </p>
<p>पुणे : "माध्यमे ही जशी जागृतीची साधने आहेत, तशी ती भीतीची दुकानेही आहेत. माध्यमांमधील हा कल्लोळ पूर्वीपासून आहे. त्यामुळे माध्यमांना दोष देण्याऐवजी त्यातले चांगले-वाईट समजून घ्यायला हवे. त्यासाठी तारतम्य बाळगत, मधली ओळ वाचत आपण माध्यम साक्षर व्हायला हवे," असे प्रतिपादन ज्येष्ठ नाट्य-दिग्दर्शक अतुल पेठे यांनी केले.</p>
<p>मनोविकास प्रकाशनातर्फे नीलांबरी जोशी लिखित 'माध्यम कल्लोळ' ग्रंथाचे प्रकाशन व मुक्त संवादात अतुल पेठे बोलत होते. टिळक रस्त्यावरील मराठा चेंबर ऑफ कॉमर्सच्या पदमजी सभागृहात झालेल्या कार्यक्रमावेळी अभिनेते गिरीश कुलकर्णी, माध्यम अभ्यासक समीरण वाळवेकर, ज्येष्ठ पत्रकार रवि आमले, मनोविकास प्रकाशनाचे अरविंद पाटकर आदी उपस्थित होते.</p>
<p>अतुल पेठे म्हणाले, "बाह्यजगात आपल्याला उत्पादन आणि ग्राहक म्हणून वापरले जाते. हिंसा आणि लैंगिकता माध्यमाच्या केंद्रस्थानी राहिली आहे. त्यातून अनेकदा मानसिक आरोग्याचे प्रश्न उद्भवतात. अशावेळी आपल्यातील विवेक जागृत ठेवायला हवा. बदलत्या तंत्रज्ञानानुसार आपण बदल स्वीकारले पाहिजेत. जीवनशैली बदलली, तरी जीवनमूल्ये बदलता कामा नयेत. तसे झाले तर आपण या कल्लोळातही सहीसलामत राहू शकतो."</p>
<p>गिरीश कुलकर्णी म्हणाले, "सद्यस्थितीत माध्यमांत माहिती आणि कलकलाट अधिक आहे. आपल्या आकलन, अनुभवाइतकेच आपण बोलावे. ग्राहककेंद्री माध्यमात रोज नवे भोग करून विकले जातात. जगण्याची स्पर्धा, भांडवलाची गरज यामुळे हा कल्लोळ सातत्याने होत राहील, त्यात आपण किती बुडायचे हे प्रत्येकाने ठरवावे. माणूस बनण्याची प्रक्रिया सातत्याने सुरु असते. या कल्लोळापासून जे दूर आहेत, ते आजही खळाळून हसतात. आनंदी जीवन जगतात."</p>
<p>समीरण वाळवेकर म्हणाले, "माहिती आणि बातमी यात फरक आहे. सध्या ब्रेकिंगच्या जमान्यात खऱ्याचा आभास निर्माण करून ती बातमी पोहोचवली जाते. त्यातून फेक न्यूज प्रतिबिंबित होते. आपण माध्यम साक्षर आहोत हा भ्रम आहे. विकृत प्रयोगातून निर्माण झालेले उत्पादन आपल्यापर्यंत येऊ द्यायचे नसेल, तर आपण माध्यम साक्षर होण्याची गरज आहे."</p>
<p>रवि आमले म्हणाले, "असत्य, अर्धसत्य हा प्रपोगंडाचा पाया असून, माध्यमे त्याचे वाहक आहेत. परंतु माध्यमांचे व्यवस्थापन चालण्यासाठी जाहिराती गरजेच्या आहेत. अर्थकारण जुळत नसल्याने माध्यमातील अनेक लोक दरिद्री अवस्थेत आहेत. त्यामुळे वाचक, प्रेक्षक म्हणून आपण जागृत राहून त्यातील चांगले ते घेण्याचा प्रयत्न केला पाहिजे."</p>
<p>अरविंद पाटकर म्हणाले, "वाचनसंस्कृती लोप पावतेय, हा माध्यमातून होणारा अपप्रचार आहे. आपण  वाचकांपर्यंत पोहोचण्यात कमी पडतो. ही दुरावस्था थांबवण्यासाठी वाचकांनी जागृतपणे पुस्तके वाचली पाहिजेत. लोकांपर्यंत पुस्तके पोहोचण्यासाठी प्रयत्न व्हावेत. पुस्तकांवरील जीएसटीमध्ये सवलत द्यावी. महाराष्ट्रातील ३६ जिल्ह्यांपैकी २० जिल्ह्यात ललित साहित्याचे दुकान नाही, याची खंत वाटते."</p>
<p>माधुरी कुलकर्णी यांनी सूत्रसंचालन केले. अरविंद पाटकर यांनी स्वागत-प्रास्ताविक केले.<br />--------------------------------------<br />'माध्यम कल्लोळ' उलगडताना...<br />"सर्वच प्रकारच्या माध्यमांचा जनमानसावर होणारा परिणाम यात मांडला आहे. मालिका, चित्रपट, प्राईम टाइम, ओटीटी प्लॅटफॉर्म, अटेंशन इकॉनॉमी, सनसनाटी बातम्या, जाहिराती, मोबाईल, इंटरनेट, स्क्रीन अॅडिक्शन, नोमोफोबिया, आत्मकेंद्री, सेल्फी, टेक्नोफेरन्स, सायबर बुलिंग, ट्रोलिंग अशा गोष्टींचा परिणाम समाजावर होतो. लाईक्स, कमेंटला अधिक प्राधान्य दिले जाते. त्यातून सायबर गुन्हेगारी वाढीस लागते. या कल्लोळात आपणही बुडतो आहोत, या गोष्टी लक्षात येत नाहीत. अशा सगळ्या गोष्टींचा उहापोह यात केला आहे."<br />- नीलांबरी जोशी, लेखिका<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>साहित्य आणि साहित्यिक</category>
                                    

                <link>https://www.adhunikkesari.com/article/6281/mah</link>
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                <pubDate>Sun, 25 Sep 2022 17:38:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Aadhunik Kesari]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वातंत्रदेवता....</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p>आधुनिक केसरी</p>
<p>सागरकुमार झनके,<br />गौलखेड,ता:जळगाव जा,<br />9822575244</p>
<p>    इंग्रजांनी भारत सोडला आम्ही स्वातंत्र्य झालो...<br />आणि इथल्याच भांडवलदारांचे कायमचे गुलाम झालो...</p>
<p>ते गुलामिच्या बेड्या  टाकत गेले,<br />आम्ही त्या तोडीत आलो...<br />त्यांनी स्वातंत्र्याच अजरमर गीत लिहलं,<br />आम्ही तेच तालासुरात गात आलो...</p>
<p>त्यांनी घोषणा दिल्या," भारतमाता की जय"<br />आम्ही हात वर करत गेलो...<br />त्यांनी राष्ट्रध्वज फडकविला<br />आम्ही अभिमानाने सलामी देत गेलो...</p>
<p>दिवसामागे दिवस वर्षामागे वर्ष निघून गेली,<br />पण स्वातंत्र्याची चव आम्हाला चाखता नाही आली...</p>
<p>आज आमच्या आयुष्यात स्वातंत्र्यांचा सुर्य उगवला खरा<br />पण ती काळोखी रात्र अजूनही  जाता जात नाही....</p>
<p>स्वतंत्र भारत देशात अन्न धांण्यांची मोठमोठी कोठारे भरली आहेत...<br />पण आमचं टीचभर पोट अजूनही रिकामच</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.adhunikkesari.com/article/5718/po"><img src="https://www.adhunikkesari.com/media/400/2022-08/ebf88087956effe37372691e654b9a31.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p>आधुनिक केसरी</p>
<p>सागरकुमार झनके,<br />गौलखेड,ता:जळगाव जा,<br />9822575244</p>
<p>  इंग्रजांनी भारत सोडला आम्ही स्वातंत्र्य झालो...<br />आणि इथल्याच भांडवलदारांचे कायमचे गुलाम झालो...</p>
<p>ते गुलामिच्या बेड्या  टाकत गेले,<br />आम्ही त्या तोडीत आलो...<br />त्यांनी स्वातंत्र्याच अजरमर गीत लिहलं,<br />आम्ही तेच तालासुरात गात आलो...</p>
<p>त्यांनी घोषणा दिल्या," भारतमाता की जय"<br />आम्ही हात वर करत गेलो...<br />त्यांनी राष्ट्रध्वज फडकविला<br />आम्ही अभिमानाने सलामी देत गेलो...</p>
<p>दिवसामागे दिवस वर्षामागे वर्ष निघून गेली,<br />पण स्वातंत्र्याची चव आम्हाला चाखता नाही आली...</p>
<p>आज आमच्या आयुष्यात स्वातंत्र्यांचा सुर्य उगवला खरा<br />पण ती काळोखी रात्र अजूनही  जाता जात नाही....</p>
<p>स्वतंत्र भारत देशात अन्न धांण्यांची मोठमोठी कोठारे भरली आहेत...<br />पण आमचं टीचभर पोट अजूनही रिकामच आहे...</p>
<p>ते चंद्रावर राहण्याच्या मोठमोठ्या बाता करतात...<br />पण आमचा आदिवासी अजूनही राणावणातच भटकतोय अजूनही...</p>
<p>हे,स्वतंत्र देवते,तु एैकतेसना...!<br />बघ तुझ्याच देशात अजूनही कित्येक घरात स्वातंत्र्यांचा उजेड पडलाच नाही...<br />भूकीनं कित्येकांचा जीव घेतलाय...<br />बेसहारा लोकांची गर्दी वाढतच आहे...<br />भुकिच्या आकांतान हंबरडा फोडणारी लेकरं आपल्याला जागोजागी दिसतात...कधी रेल्वे स्टेशन,बस स्टँड तर कधी संवेदना मेलेल्या लोकवस्तीत...</p>
<p>तु चल माझ्याबरोबर,<br />मी दाखवतो तुला गोरगरिबांच्या रक्तावर उभारलेले मोठमोठे हलकट श्रीमंताचे बंगले...<br />आणि त्याला लागुणच गरिबाचा जगण्यासाठी चाललेला संघर्ष...</p>
<p>अग,त्यासाठीच तर <br />अंन्नाभाऊनी "ये आझादी झुटी है,देश की जनता भूकी है" ची भिमगर्जना दिली मुंबईतील चौकाचौकात...</p>
<p>खूप सोसलं आणि खूप भोगलही...<br />पण आता हे सारं उलथून टाकलं पाहिजे...<br />भांडवली व्यवस्थेची दारं आता कायमची बंद केली पाहिजे...<br />त्या काळोख्या वस्तीत उजेडाची किरणं पडलीच पाहिजे...<br />आणि गरिबाच्या झोपडीतला विझलेला दिवा पुन्हा पेटलाच पाहिजे...</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>साहित्य आणि साहित्यिक</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Aug 2022 09:06:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Aadhunik Kesari]]></dc:creator>
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                <title> नोकरदार बायकांचा श्रावणोत्सव </title>
                                    <description><![CDATA[<p>आधुनिक केसरी </p>
<p>घरातली काम, ऑफिसच्या वेळा आणि सुट्ट्या ऍडजेस्ट करून घरातच मंगळागौर, हळदी कुंकू, सवाष्ण जेवू घालणं इत्यादी काम आपल्या घरातल्या घरात त्या करत असतात. यात परंपरा जपण्याएवढं समाधान असतं तितकंच काही क्षणांचा विरंगुळा मिळण्याचा अट्टाहासही असतो. पण सण साजरे करण्याची धावपळ आज फक्त नोकरदार बायकांचीच होते असं नाही तर शहरात राहणाऱ्या प्रत्येक बाईची आज हीच परिस्थिती आहे. मनाचा उत्साह कृतीतून दाखवण्यासाठी त्यांना पुरेसा वेळच नसतो. पण म्हणून रोजच्या दगदगीन श्रमणाऱ्या मनाला चैतन्याची उभारी देणाऱ्या या उत्सवांना त्यातील प्रथांना फाटा देण्याची मात्र या बायकांची इच्छा नसते. </p>
<p>श्रावण सरीच्या बरोबरीनंच श्रावणात येणारे सण या पाघोळयांसारखेच अनोळखी. घरातल्या आज्ज्या आयांचा अट्टाहास असतो</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.adhunikkesari.com/article/5483/lekh"><img src="https://www.adhunikkesari.com/media/400/2022-07/bhavna-gandhile1.jpg" alt=""></a><br /><p>आधुनिक केसरी </p>
<p>घरातली काम, ऑफिसच्या वेळा आणि सुट्ट्या ऍडजेस्ट करून घरातच मंगळागौर, हळदी कुंकू, सवाष्ण जेवू घालणं इत्यादी काम आपल्या घरातल्या घरात त्या करत असतात. यात परंपरा जपण्याएवढं समाधान असतं तितकंच काही क्षणांचा विरंगुळा मिळण्याचा अट्टाहासही असतो. पण सण साजरे करण्याची धावपळ आज फक्त नोकरदार बायकांचीच होते असं नाही तर शहरात राहणाऱ्या प्रत्येक बाईची आज हीच परिस्थिती आहे. मनाचा उत्साह कृतीतून दाखवण्यासाठी त्यांना पुरेसा वेळच नसतो. पण म्हणून रोजच्या दगदगीन श्रमणाऱ्या मनाला चैतन्याची उभारी देणाऱ्या या उत्सवांना त्यातील प्रथांना फाटा देण्याची मात्र या बायकांची इच्छा नसते. </p>
<p>श्रावण सरीच्या बरोबरीनंच श्रावणात येणारे सण या पाघोळयांसारखेच अनोळखी. घरातल्या आज्ज्या आयांचा अट्टाहास असतो म्हणून आत्ताच्या मुला-मुलींना नागपंचमी, मंगळागौर, जीवती पूजन हे किमान ऐकून तरी माहिती आहे. त्यांच्या कहाण्या आणि त्या दिवशी केले जाणारे पदार्थ हेही आत्ताच्या मुलांना नावानं ओळखीचं असलं तरी अनोळखीच आहेत. श्रावण आला की मनालाच नाही तर जणूकाही निसर्गालाही आनंद होतो.मनाला आनंद देणारा हा श्रावण आपल्याबरोबर सण, उत्सव व्रतवैकल्यांची शृंखला घेऊन येतो. बायका आणि श्रावणाचं नातं किती जिवाभावाचं असतं हे वेगळं सांगायला नको मंगळागौर, नागपंचमी, नारळी पौर्णिमा या सगळ्यांच सणांचं बायकांशी एक आपुलकीचं नातं असतं हे नातं पूर्वापार चालत आलेले आहे; मात्र आता हे नातं पूर्वीसारखाच आहे असं म्हणता येणार नाही आणि राहणार तरी कसं? कारण परिस्थिती ही तितकीच बदलली ना? पण म्हणून श्रावण आणि त्यानिमित्त येणाऱ्या सणावाराला कराव्या लागणाऱ्या प्रथा परंपरांना मुरड घालावी असं थोडीच आहे. सडा रांगोळी घालण्यासाठी आता अंगणच नाही; पण तरीही श्रावणात का होईना उंबरठ्यासमोर छापायची रांगोळी तर काढता येईलच ना.  दाराला लोकरीचं मण्यांचं बाजारात विकत मिळणार तोरण तर लावता येईल. आपली आई करायची त्याचप्रमाणे सण साजरा करता आले नाही तरी इन्स्टंटच्या जमान्यात जसं शक्य आहे तसे सण साजरा करायला हवेत हाच विचार मनात येतो. शहरात राहायला आलो शहराशी जुळवून घेतले तरीही आपल्या गावात केल्या जाणाऱ्या सणांची आठवण आजही मनात कोठे ना कोठे ताजी आहेच.  मग या श्रावणात पुन्हा पूर्वीसारखीच परंतु थोडी मॉडल टच असलेली मंगळागौर गजबजलेल्या शहराच्या सोसायटीमध्ये का साजरी होऊ नये? शहराच्या गजबजामध्ये आपण हरवून गेलो आहेत रोजच्या चक्राला जुंपून घेतल्याप्रमाणे बायका काम करत राहतात स्वतःसाठी उसंत काढायची असते पण तशी संधीच मिळत नाही पण ऋतूप्रमाणे बदलणारा निसर्ग त्यांच्याही मनाला साद घालतो श्रावणातला बहर, सणा उत्सवांच्या चाहूली, सुखावणार वातावरण त्यांच्याही मनात प्रसन्नता पेरण्याचं काम करतच असतं म्हणूनच मिळेल त्या वेळेत जमेल त्या पद्धतीने सण साजरी करण्याचा प्रयत्न या बायका करत असतात. घरातली काम, ऑफिसच्या वेळा आणि सुट्ट्या ऍडजेस्ट करून घरातच मंगळागौर, हळदी कुंकू, सवाष्ण जेवू घालणं इत्यादी काम आपल्या घरातल्या घरात त्या करत असतात. यात परंपरा जपण्याएवढं समाधान असतं तितकंच काही क्षणांचा विरंगुळा मिळण्याचा अट्टाहासही असतो. पण सण साजरे करण्याची धावपळ आज फक्त नोकरदार बायकांचीच होते असं नाही तर शहरात राहणाऱ्या प्रत्येक बाईची आज हीच परिस्थिती आहे. मनाचा उत्साह कृतीतून दाखवण्यासाठी त्यांना पुरेसा वेळच नसतो. पण म्हणून रोजच्या दगदगीन श्रमणाऱ्या मनाला चैतन्याची उभारी देणाऱ्या या उत्सवांना त्यातील प्रथांना फाटा देण्याची मात्र या बायकांची इच्छा नसते. पूर्वीच्या काळी मंगळागौर ही रात्रभर जागवली जायची नवविवाहित महिलेच्या सख्या, शेजारणी येऊन रात्रभर गाणी नृत्य करत मंगळागौर साजरी करायच्या पण आता सकाळीच ऑफिसला जावं लागतं. लवकर उठावं लागतं. त्यामुळे गजराचा आदेश पाळण स्त्रियांना बंधनकारक आहे. त्यामुळे आता मंगळागौर जागवली जात नाही; तर आत्ताची मंगळागौर तासा दोन तासाच्या खेळाच्या पॅकेजमध्ये बसवून खेळली जाते. मंगळागौर खेळणाऱ्या बायकांच्या ग्रुपला बोलवलं जातं. या बायका दोन-तीन तासाचा मंगळागौरीचा कार्यक्रम सादर करतात परंपरेप्रमाणेच मंगळागौर साजरी करायची असा अट्टाहास ठेवला. तर श्रावणामागून श्रावण सरीत पण त्या पद्धतीने मंगळागौर जागवायला वेळ मिळणार नाही मंगळागौरीच्या या आधुनिक आणि छोटे खाणी रूपामुळे बायकांना एकत्र येऊन खेळण्याचा किमान आनंद तरी मिळतो. श्रावणी शुक्रवारी घरात हळदीकुंकू करण्याची पध्दत आहे. मात्र नोकरदार बायकांना घरी जायचा उशीर होतो. मग त्यानंतर हळदीकुंकू करण शक्य नसतं. मग अशावेळी ऑफिसमध्येच हळदीकुंकू केलं जातं. दर श्रावणी शुक्रवारी ऑफिस मधील एक एक विभाग हळदीकुंकू करतो यावेळी प्रसाद म्हणून गुळ-फुटाणे दिले जातात. सर्व बायका एकत्र येऊन संध्याकाळी हळदीकुंकू करतात या दिवशी प्रत्येक बाईनं साडी नेसली पाहिजे असाही काही ऑफिसमध्ये रुल असतो. यानिमित्त साड्या नेसण्याची हौसही बायका पुरवून घेतात.</p>
<p>काही सोसायटीमध्ये श्रावण साजरा करण्यासाठी खास कार्यक्रमाचे आयोजन केलं जातं. त्यामध्ये सोसायटीमधील बायका आपल्या कला सादर करतात साधारणतः शनिवारी संध्याकाळी या कार्यक्रमाचे आयोजन केले जातं म्हणजे थोडा उशीर झाला तरी रविवार सुट्टीचाच असते. यामध्ये बायका गाणी म्हणतात, डान्स करतात, नकला करतात. अशा वेगवेगळ्या कला सादर करतात श्रावण सेलिब्रेट करतात. श्रावण हाच एक महिना असतो ज्यात सण, पूजा प्रथा खचाखच भरलेल्या असतात. या सणांना देवाला काही खास पदार्थांचा नैवेद्य केला जातो, तसेच श्रावण महिन्यात बाजारात निरनिराळ्या भाज्या मिळतात त्यापासून नानाविध पदार्थ होतात. श्रावणात खाण्याची खूप चंगळच असते ही चंगळ एक सेलिब्रेशन करता यावे म्हणून सोसायटीतील बायका एकत्र येऊन पाककृती स्पर्धेचा आयोजन करतात आणि खास श्रावणात बनवले जाणारे पदार्थ या स्पर्धेत सादर करतात आणि स्पर्धा संपल्यावर एकत्र जमून या पदार्थांचा आस्वाद घेतात. खरंतर मंगळागौर भोंडला यांसारखे आनंद देणारे सण उत्सव आजही या बायकांनी जपून ठेवलेले आहेत. किमान तेच त्यांच्या मनाला आनंद रूप देण्याचे कार्य करत असतात.</p>
<p><img src="https://www.adhunikkesari.com/media/2022-07/bhavna-gandhile1.jpg" alt="bhavna gandhile"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                            <category>सण - उत्सव</category>
                                            <category>कला</category>
                                            <category>साहित्य आणि साहित्यिक</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Jul 2022 14:51:55 +0530</pubDate>
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